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याद रखने योग्य बाते

30 प्रतिशत मेंबर ब्लाक पंचायत समिति के सदस्य होने चाहिए( ब्लाक पंचायत समिति के अध्यक्ष/अध्यक्षा, अथवा इसके सदस्य, कम से कम एक महिला के साथ)

ब्लाक में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की कमेंटी में केन्द्र से 20 प्रतिशत सदस्य गैरआफिसयिल होने चाहिए। यह वार्षिक चक्र में होना चाहिए सभी पीएचसी को प्रतिनिधित्व मिल सके।

ब्लाक में कम्यूनिटी हेल्थ या स्वास्थ्य पर काम कर रहे लोगों/सीबीओ/एनजीओ/संगठनों को भी 20 प्रतिशत सीटें मिलनी चाहिए। यह वे लोग हों जो कि योजनाओं/सेवाओं को लागू करवाने में दखल देते हों।

20 प्रतिशत मेंबर आफिसियल होने चाहिए जैसे कि

ब्लाक मेडिकल का अफसर

ब्लाक डेवेलपमेंट अफसर

ब्लाक में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के मेडिकल अफसर

सीएचसी स्तर की रोगी कलयाण समिति के भी दस प्रतिशत लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

अध्यक्ष

ब्लाक पंचायत समिति प्रतिनिधि

कार्यकारी अध्यक्ष

ब्लाक मेडिकल आफिसर की सेक्रेटरी

एक एनजीओ/सीबीओ प्रतिनिधि

 

राष्ट्रीय स्तर पर मिशन को एक कमेटी द्वारा चलाया और लागू किया जा रहा है जिसके अध्यक्ष स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हैं।

राज्य के स्तर पर राज्य स्वास्थ्य मिशन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में देखा और लागू किया जाता है। जननी सुरक्षा योजना के लिए स्टेट मिशन का डायरेक्टर एक नोडल आॅफिसर मनोनीत करता है और वह भारत सरकार से जल्दी ही कम्यूनिकेट करता है।

राज्यस्वास्थ्यमिशनकेनियमोंकेतहतलागूकर्ताकमेटीद्वाराजननीसुरक्षायोजनाकेसंचालनकेलिएभारतसरकारकेनियमोंकेमुताबिकएककमटीबनाईजातीहै।

लागूकर्ता कमेटी द्वारा राज्य का एक्शन प्लान भी एनआरएचएम के नियमों के मुताबिक होता है जो यह देखता है कि जननी सुरक्षा योजना पर प्रभावी हो। यह तय करता है कि जिला आधारित लाभार्थी कितने होंगे और किसी वित वर्ष में उनके लिए कितने फंड की आवश्यकता होगी।

 

राज्य द्वारा आवश्यक रचना तंत्र बनाते हुए योजना बनाकर संस्थान के मेडिकल आॅफिसर द्वारा प्रमाणित करवाया जाएगा कि महिला ने वहां से इलाज करवाया है। यह लाभ के पहुंचने की पहली आवश्यक शर्त होगी।

राज्य स्वास्यि मिशन के निर्देशों के तहत कमेटी के काम निम्न होंगे-

जिलों की मांग और जरूरत के हिसाब से उन्हें फंड स्वीकृत करना।

योजना से संबंधित मामलों को निपटाते हुए योजना की मानिटरिंग करना और जांचना और

भारत सरकार के लिए आवश्यक रिपोर्ट बनाना।

जेएसवाई योजना के लाभ का प्रचार प्रसार करते  हुए योजना का लाभ प्राप्त करने के  तरीकों को पोस्टर, परचे, मीडिया और डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से सभी उपकेन्द्रों, पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों, शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों, हेल्थ पोस्ट और योजना के लिए मान्य प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होम/ क्लीनिक के बारे में बताना जहां योजना का लाभ मिलता हो।

राथमिक स्वास्थ्स केन्द्रों द्वारा कुछ खास फोकसः

नवजात प्रतिरक्षण प्रोग्रामः राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत नवजात बच्चों का प्रतिरक्षण पीएसची द्वारा किया जाता है। यह प्रोग्राम पूरी तरह से अनुदान पर है।

गर्भावस्था से उससे संबंधित देखभालः ग्रामीण भारत में पीएचसी सिस्टम का मुख्य फोकस गर्भावस्था की मेडिकल देखभाल और बच्चे के जन्म से संबंधित है। क्योंकि ग्रामीण भारत में लोग गर्भावस्था में देखभाल के लिए डाक्टरी सहयोग का समर्थन नहीं करते। यह प्रसव के  दौरान मृत्युदर बढ़ा देता है।इस तरह से पीएचसी द्वारा गर्भावस् में देखभाल पर बड़ा फोकस किया जाता है।

आशा, अतिरिक्त नर्स या मिडवाइफ के सुपरविजन में अथवा आंगनबाड़ी वर्कर द्वारा बेहतर सपोर्ट निम्न तरीके से दिया जाता है-

योजना की लाभ प्राप्त करने वाली लाभुक के रूप में बीपीएल परिवारों से गर्भवती महिलाओं की पहिचान करना

एएनएम को रिपोर्ट करना और महिला को उपकेन्द्र/प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र लाकर रजिस्ट्रेशन करवाना।

यदि बीपीएल कार्ड नहीं हे तब महिला को बीपीएल प्रमाणपत्र दिलवाने में मदद करना

म्हिला को नियमित अंतराल पर कम से कम तीन चेकअप के लिए मदद उपलब्ध करवाना

सांस्थानिक प्रसव के लिए उसे सलाह देना और गर्भावस्था के सात माह पहिले ही महिला की सलाह से डिलीवरी केन्द्र तय करना।

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