जानकारी

इंटरस्टेट माइग्रेशन एलायंस श्रमिकों के संघर्ष को वैसे जगहों से जहाँ से सबसे ज़्यादा मज़दूर बाहर काम करने जाते हैं और उनका गंतव्य क्षेत्र जहाँ वो सबसे ज़्यादा प्रवासित होकर पहुँचते हैं, को आपस में जोड़ता है। 2016 तक, जहाँ से सबसे ज़्यादा श्रमिकों का प्रवासन होता है और जहाँ सबसे ज़्यादा ये मज़दूर काम करने जाते हैं उन्हें मीग्रेंट्राइट सेंटर (एमआरसी) के नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने, के लिए इंटरस्टेट माइग्रेशन अलायन्स ने गुड़गांव, हरियाणा, कटिहार, बिहार; रांची, झारखंड; और कानपुर, उत्तरप्रदेश में एमआरसी की स्थापना की है। एमआरसी के साथ उनके नोडल केंद्र के रूप में, इंटरस्टेट माइग्रेशन एलायंस गठबंधन भागीदारों के बीच आपस में सीख ने की सुविधा देता है; और स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग से केवल प्रवास नीति और प्रथाओं के बारे में सूचित किया जाता है। यह एकीकृत ग्रामीण-शहरी दृष्टिकोण अनौपचारिक विकास, ग्रामीण विस्थापन, बढ़ते प्रवासन, शहरी गरीबी और अनौपचारिक श्रमिक क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की बढ़ती भीड़ से जुड़े श्रमिकों के अधिकारों के दुरुपयोग को संबोधित करने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, क्योंकि खासकर कार्यस्थल पर उनके काम के अधिकारों का हनन की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।

माइग्रेंट राइट सेंटर (एम आर सी) प्रत्येक लक्ष्य क्षेत्र में कम से कम 15 जिलों में पहले से उपस्थित और नए सहयोगियों के साथ मिलकर इंटरस्टेट माइग्रेशन एलायंस के नोडल केंद्र के रूप में सेवा प्रदान करता हैं। एमआरसी स्थानीय साझेदार संगठनों को प्रवासी मजदूरों को कानूनी अधिकार और न्याय दिलाने की दिशा दिखने के लिए प्रशिक्षण देने में सहायता करते हैं। एक व्यापक प्रशिक्षण दृष्टिकोण (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) और प्रचलित तकनीकी सहायता के माध्यम से, एमआरसी का उद्देश्य स्रोत और गंतव्य श्रमिक स्थान में श्रमिक और उनके समूह, सिविल सोसाइटी के संगठनों और ट्रेड यूनियनों की क्षमता को बढ़ावा देना है जिससे की वे वैकल्पिक विवाद समाधान, कानूनी चैनलों और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से शारीरिक, यौन हिंसा और आर्थिक मामलों में प्रवासी कामगारों को यथोचित न्याय दिला सके।

सोसाइटी फॉर लेबर एंड डेवलपमेंट (एसएलडी): 2006 में स्थापित सोसाइटी फॉर लेबर एंड डेवलपमेंट (एसएलडी), दिल्ली स्थितएक श्रम अधिकार संगठन है। एसएलएडी श्रमिकोके सामाजिक और आर्थिक कल्याण की वकालत करके महिलाओं और प्रवासियों के अधिकारों और वंचित लोगों के बीच सांस्कृतिक नवीनीकरण पर विशेष जोर देने के साथ न्यायसंगत विकास को बढ़ावा देता है। आज एसएलडी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में काम कर रहा है। एसएलएडी के कई अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में सहयोगी संगठन हैं।

पिछले दो दशकों में, भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र में रोजगार में गिरावट और विकास की रणनीतियों में बदलाव आने के कारण बदल गई है, जो कि शहरी औद्योगिक केन्द्रों में केंद्रित वैश्विक श्रम निष्कर्षण को बढ़ावा देता हैं। 2008 में, भारत के नेशनल सैंपल सर्वे आर्गेनाईजेशन (एनएसओ) ने अनुमान लगाया कि भारत की कुल आबादी में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा आंतरिक प्रवासियों का है। जो कई प्रकार की हिंसा व भेदभाव का सामना करते हैं जैसे, वर्ग के आधार पर, लिंग और सामाजिक पहचान के आधार पर। प्रवासी श्रमिकों में अपने आप को बचाने के लिए अनुकुलित परिस्थिती में ढ़लने की उल्लेखनीय क्षमता हैं।

रोज़ा लक्समबर्ग स्टिचुंग (आरएलएस) मूलरूप में जर्मनी में स्थित एक फाउंडेशन है जो दक्षिण एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण सामाजिक विश्लेषण और नागरिक शिक्षा के विषयों पर काम कर रही है। आरएलएस एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा देता है, और जिसका उद्देश्य समाज के वर्तमान सदस्य, और निर्णय लेने वालों को उस व्यवस्था का एकवैकल्पिक दृष्टिकोण पेश करना है। अनुसंधान संगठनों और सामाजिक मुक्ति के लिए काम कर रहे समूहों, सामजिक कार्यकर्ताओं के उन मॉडलों को विकसित करने व उनकी पहल में सहायता की जाती है जिन सबों में सामाजिक और आर्थिक न्याय देने की क्षमता है।

HELM स्टूडियो, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उनके संगठनों के लिए फंडिंग और सामाजिक संरचना समाधानों की कल्पना करता हैं, जो कि मानवाधिकारों और न्याय तक पहुँच को प्रोत्साहित करते हैं। यह प्रस्ताव जमीनी स्तर के अनुभव आधारित विशेषज्ञों के साथ क़ानूनी जानकारों और मीडिया तथा टेक्नॉलोजी प्रवीणता को एक साथ जोड़ देता है। इस तरह हम शिक्षा, कानून और मीडिया जैसे माध्यम से मानवाधिकार उल्लंघनों को तीक्ष्णता से देख पाते हैं और वंचित तबकों को उनके अधिकार और न्याय तक पहुँच में मदद कर पाते हैं।